September 26, 2021

वृतांत – Vritaant

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जानिए हर साल करोडो रूपए दान करने वाले भारत के सबसे दानवीर उद्योगपति अजीम प्रेमजी के बारे में

भारत के बड़े पूंजी पतियों में सबसे ज्यादा दान देने के मामले में जो नाम आता है वह है अजीम प्रेमजी। अजीम प्रेमजी ने साल 2020 में हर दिन 22 करोड़ रूपए दान किये और पुरे एक साल में अजीम प्रेमजी ने 7,900 करोड़ रूपए दान किये। अजीम प्रेमजी अपनी संपत्ति में से 34 प्रतिशत यानि लगभग 50,000 हजार करोड़ रूपए देश के विकास में योगदान करने के लिए दान करते है। अपनी इस तरह की छवि के कारण अजीम प्रेमजी भारत के बहुत ही धनी और दानवीर व्यक्ति है। लेकिन फिर भी लोग अजीम प्रेमजी को कंजूस क्यों कहते है ? अजीम  प्रेमजी की कंपनी विप्रो यानि वेस्टर्न इंडियन प्रोडट्स पहले सिर्फ पाम आयल बनाती थी लेकिन 1980 से अजीम प्रेमजी ने कंपनी को संभालना शुरू कर दिया और उसके बाद विप्रो आईटी और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में उतर गयी। आज विप्रो भारत की बड़ी आईटी कंपनियों में से एक है। विप्रो में आज लगभग दो लाख कर्मचारी काम करते है और इसके साथ विप्रो देश की 9वी सबसे ज्यादा कर्मचारियों वाली कंपनी है। विप्रो एक एक ऐसी कंपनी है जिसमे लगभग 93 प्रतिशत व्यापार विदेशो से होता है। यानि विप्रो में ही सबसे ज्यादा विदेशी कंपनियों द्वारा निवेश किया जाता है और यह सब अजीम प्रेमजी के मार्गदर्शन में ही हुआ है। अजीम प्रेमजी ने विप्रो को बुलंदियों तक पहुंचाया और इसमें सबसे बड़ा योगदान उनके व्यक्तित्व का रहा है। अजीम प्रेमजी का कहना है कि कंपनी को चलाने के लिए सबसे बड़ा निवेश ईमानदारी है और इसी की बदौलत विप्रो ने विश्वभर में नाम कमाया है और देश के विकास में योगदान दिया है।

कुछ लोग कंजूस, माध्यम वर्ग और छोटी सोच वाले होते है लेकिन इन सभी बातो को अजीम प्रेमजी ने अपने जीवन का हिस्सा बनाया। अजीम प्रेमजी ने अपनी कंपनी में कुछ ऐसे नियम बनाये है जैसे कि फोटो कॉपी लेते समय एक पन्ने के दोनों भाग काम में लिए जाने चाहिए। इसके अलावा कुछ अजीम प्रेमजी ने पाया कि कंपनी की बोर्ड मीटिंग में बोर्ड सदस्य अपनी कॉफी ख़तम नहीं कर रहे थे तो उन्होंने कहा कि कॉफी के कप छोटे होने चाहिए ताकि फालतू बर्बादी से बचा जा सके। अजीम प्रेमजी जैसे व्यक्ति अगर कम्पनी की छोटी से छोटी चीज़ो पर ध्यान देते है तो ऐसे व्यक्ति अपने कर्मचारियों का कितना ध्यान रखते होंगे। कई बार अजीम प्रेमजी ने अपने कर्मचारियों की उच्च शिक्षा का खर्च भी उठाया है। उनका मानना है कि वे उनके कर्मचारी है जिन्हे और बेहतर बनने की आवश्यकता है। इसके अलावा एक बार अजीम प्रेमजी की कंपनी में एक महिला कर्मचारी ने उनके जन्मदीन पर ऑफीस में पार्टी आयोजित की और ऑफिस को सजाया भी। लेकिन अजीम प्रेमजी को यह सब बिलकुल भी अच्छा नहीं लगा और उन्होंने पूरी सजावट को हटाने के लिए कह दिया। लेकिन उसके बाद उन्होंने सभी कर्मचारियों के लिए उनका मनपसंद दिलपसंद आर्डर किया। उनके इस तरह व्यक्तित्व को लोग कंजूस समझते है जबकि इससे यह सिखने की आवश्यकता है कि किसी सेलिब्रेशन का मतलब ज्यादा खर्चा या दिखावा करना नहीं होता यही हमारा भारत हमे सिखाता है।

इसके अलावा कई ऐसे करोड़पति लोग होते है जो कर्जे में दुबे होने के बाद भी कई बड़ी बड़ी पार्टिया आयोजित करते है और करोडो रूपए का स्कैम करके देश छोड़ के भाग जाते है। ऐसे में अजीम प्रेमजी जैसे उद्योगपति है जो अपने जन्मदिन पर भी अपनी कंपनी और अपने कर्मचारियों का समय बर्बाद नहीं होने देते है। लेकिन सवाल यह आता है कि आखिर अजीम प्रेमजी इतना पैसा बचाने पर क्यों ध्यान देता है और और उन पैसो का करते क्या है ? अजीम प्रेमजी भारत की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाना चाहते है। उनकी संस्था देश के कई राज्यों के सरकारी स्कूलों के साथ मिलकर काम करती है ताकि देश की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके। उनकी संस्था बेहतर शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शिक्षकों को भी प्रशिक्षण देती है। इसके अलावा कई अन्य संस्थाओ को भी करोडो रूपए दान में देती है। साल 2020 में भी कोरोना महामारी के दौरान अजीम प्रेमजी ने सबसे बड़ा दान दिया था और साल के सबसे धनी व्यक्ति बने। अजीम प्रेमजी के अनुसार पैसे को ऐसी चीज़ो पर खर्च किया जाना चाहिए जो आपके लिए कीमती हो न कि दिखावा करने के लिए। आज हर किसी अपनी दिखावे वाले जीवन से बाहर निकलर कर दूसरी चीज़ो में ख़ुशी ढूंढनी चाहिए जिससे दुसरो को भी फायदा हो सके।

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