July 29, 2021

वृतांत – Vritaant

खबर, संवाद और साहित्य

जानिए कैसे चीन पूरी दुनिया पर अपना नियंत्रण पाने की कोशिश कर रहा है?

चीन एक ऐसा देश है जो दुनिया में टेक्नोलॉजी, सेना और हथियारों के मामले में कई आगे है। चीन ने अपना ऐसा स्थायित्व बना रखा है कि दुनिया के लगभग सभी देश किसी न किसी क्षेत्र में चीन पर निर्भर है। चाहे सस्ते संसाधनों की बात करे या तकनीक की, चीन हर तरह से संपन्न है और इसी के चलते चीन दुनिया में सबसे ज्यादा व्यापर करने वाला देश है। दुनिया भर में अपनी वस्तुओ को निर्यात करने के कारण चीन आर्थिक रूप से भी बहुत आगे निकल गया है। ऐसे में अब चीन कई सालो  कुछ ऐसी हारते कर रहा है जिसमे दुनिया भर के देशो के लिए चिंता खड़ी कर दी है। पिछले कुछ सालो से अगर हम चीन के द्वारा की गयी हरकतों को ध्यान से देखे तो हम एक अलग तरह का प्रारूप सामने पाते है। साल 2020 में चीन के सैनिको ने भारतीय सैनिको के साथ गलवान घाटी में टकराव किया। उसके बाद भारत और चीन के सैनिक धीरे धीरे पीछे है गए। इस घटना को देखने के बाद यही लगता है कि अब सब कुछ ठीक हो गया है लेकिन क्या सच में ऐसा है ? हालाँकि भारत -चीन सीमा पर चीन के लगभग 15 हजार सैनिक तैनात रहते है लेकिन पिछले कुछ दिनों में देखे तो चीन ने भारतीय सीमा पर अपने सैनिको की संख्या को बढाकर 50 हजार तक कर दिया है। हिमालय क्षेत्र की सीमाओं पर चीन अपने सैनिको के रहने के लिए टेंट बना रहा है। इसके अलावा भारत के अरुणाचल प्रदेश सीमा में आकर चीन गांव भी बसा लिया है। आखिर चीन की क्या योजना है ? इसको जानने के लिए हमे कई बातो और कड़ियों को आपस में जोड़ने की जरुरत है ताकि पूरी दुनिया को चीन की योजनाओ के बारे में पता चल सके।

चीन आज पूरी दुनिया के सबसे बड़ा कर्जदाता देश है जिसने दुनिया के कई गरीब और विकासशील देशो को भारी कर्जा दिया हुआ है। चीन अन्य देशो को कर्जा देने के मामले में विश्व बैंक, अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष और ओईसीडी के द्वारा दिए गए कुल ऋण से भी कई ज्यादा है। हालाँकि चीन ने दुनिया  के कई देशो को कर्ज दिया है लेकिन चीन ने कई कड़ी शर्तो को भी इसमें रखा है। इसमें सबसे अलग और विचित्र शर्त है यह है कि जिस देश ने कर्ज लिया है उसे एक अलग अकाउंट बनाना होगा और यह अकाउंट किस बैंक में होगा यह केवल चीन के द्वारा ही तय किया जायेगा। इसके अलावा कई शर्तो में यह भी बताया गया है कि कर्ज और समझौते से जुडी सभी बातो को गुप्त रखा जाये। इससे चीन उस देश पर आसानी से दबाव बना सकता है जिसको चीन ने कर्ज दिया है। इसके अलावा चीन कर्ज देने से पहले एक और शर्त यह रखता है कि किसी भी देश में निर्माण या किसी प्रोजेक्ट के लिए चीनी कंपनी को ही कॉन्ट्रैक्ट मिले। जिससे चीनी लोग ही दूसरे देश में उस प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए जाते है और चीन के द्वारा दिए गए पैसा फिर से चीन के पास ही आ जाता है। यदि प्रोजेक्ट सफल होता है तब भी चीन का इसमें फायदा है और सफल न भी हो तब भी चीन को इसमें कोई नुकसान नहीं होता है क्योकि चीन खुद उस प्रोजेक्ट को कम दामों खरीद लेता है। इससे चीन को दुगुना फायदा होता है।

हाल ही में श्री लंका के हंबनटोटा पोर्ट के साथ भी ऐसा ही हुआ है। कहने को यह पोर्ट श्री लंका का है लेकिन इसका लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा चीन के पास है। यानि भविष्य में चीन इस पोर्ट पर खुद की जल सेना का बसाए भी बना सकता है। इसके अलावा पाकिस्तान के साथ कई प्रोजेक्ट पर भी चीन काम रहा है जो भारत की सीमा के पास है। इसके अलावा म्यांमार, नेपाल, बांग्लादेश, मालदीव, कम्बोडिअ, मगोलिया आदि देशो में भी कई प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है और अपनी शक्ति को बढ़ा रहा है। केवल भारत ही नहीं बल्कि कुल 17 देशो के साथ सीमा के मामले में चीन के विवाद है। चीन का विवाद केवल एशिया में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में है। चीन एक ऐसे प्रारूप के साथ साथ चल रहा है जिसमे दूसरे के साथ व्यापार के नाम पर उसी को गरीब बना दिया जाता है। यही प्रारूप अंग्रेजो ने भी अपनाया था और कई देशो पर अपना राज किया था और चीन भी अब ऐसा ही कुछ प्रारूप अपना रहा है। ऐसे में भारत सहित कई देशो को चीन की योजनाओ को समझने और सावधान रहने की आवश्यकता है।

कोरोना वैक्सीन के बारे फैली अफवाहों का सच – Covid19 Vaccine Myths vs Facts in Hindi

%d bloggers like this: