July 29, 2021

वृतांत – Vritaant

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भारत के लिए जनसंख्या वृद्धि है एक बड़ी समस्या, सरकार को इस मामले में अब सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है

लोगो के बीच जनसंख्या वृद्धि को लेकर अलग अलग विचार है। कुछ लोगो के लिए यह भारत की सबसे बड़ी और गंभीर समस्या है और कुछ लोगो के लिए यह अवसर। यह सवाल सालो से उलझन पैदा करता हुआ आया है कि आखिर जनसंख्या वृद्धि को किस नजरिये से देखना चाहिए। इस मामले को लेकर कई वाद-विवाद भी होते है जिसमे कई लोगो को यह भारत के विकास में बाधा लगता है और कई लोगो यह एक वरदान लगता है। अगर साफ़ शब्दों में बिना किसी उलझन के कहे तो जनसंख्या वृद्धि एक बहुत बड़ी समस्या है क्योकि इसका सीधा प्रभाव हमारा पर्यावरण पर होता है। भारत की बात की जाये तो भारत के पास दुनिया की कुल भूमि है केवल 2.4 प्रतिशत है भाग है, 4 प्रतिशत पानी है और 16 प्रतिशत जनसंख्या है। इस जनसंख्या की जरूरतों को पूरा करने की बात की जाये तो बिजली के लिए कोयले की खाने खोदी जाती है, कम खर्चे में ज्यादा फल और सब्जियों के उत्पादन के लिए कई तरह के रसायनो का प्रयोग किया जाता है। इससे प्रदूषण बढ़ता है और आज भी देश में 40 प्रतिशत लोगो को पीने का पानी भी नहीं मिल पाता है। लेकिन अगर बात की जाये कि जनसंख्या से आखिर देश को क्या फायदा होता है ? तो इसका जवाब होता है कि जनसंख्या से देश की अर्थव्यवस्था को तेजी मिलती है। इसमें सबसे बड़ा योगदान होता है भारत के माध्यम वर्ग का जो देश की अर्थव्यवस्था को बनाये रखने में सबसे ज्यादा सहयोग करता है। भारत की ज्यादातर जनसंख्या जवान है जो खर्च भी करता है और बचाता भी है और इसके अलावा कही न कही निवेश भी करता है।

इन सभी चीज़ो से भी हमारे देश की जीडीपी को तेजी मिलती है। यानि माधयम वर्ग एक ऐसा वर्ग है जो खुद काम करता है, सरकार को टैक्स देता है और देश के विकास में मदद करता है। लेकिन क्या जीडीपी ही किसी देश के विकास को मापने का साधन है ? अगर भारत के पडोसी देश भूटान की बात की जाये तो भूटान 1971 से जीडीपी की गणना नहीं करता है बल्कि ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस की गणना करता है। भूटान की जनसंख्या बहुत ही कम है जिसकी वजह से वहा पर कोई भी बेघर नहीं है न ही कोई भिखारी है। यदि किसी व्यक्ति के पास रहने के लिए घर नहीं  होता है तो भूटान के राजा द्वारा उसे जमीन दे दी जाती है लेकिन भारत की जनसंख्या ज्यादा है कि यहाँ पर ऐसा संभव नहीं है। लेकिन एक अच्छी बात यह है कि अब भारत की जनसंख्या वृद्धि दर कम हो रही है। भारत में आजादी के बाद जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिए 35 जनसंख्या नियंत्रण विधेयक लाये गए लेकिन उनमे से कोई असरदार नहीं था।

1970 के बाद दुनिया की जनसंख्या नियंत्रित होने लगी थी लेकिन भारत की जनसंख्या कम होने की बजाय बढ़ती ही चली गयी। पूरी दुनिया में जनसंख्या के मामले में चीन सबसे ऊपर आ गया इसलिए चीन ने जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिए केवल एक से ज्यादा बच्चे पैदा करने पर रोक लगा दी। इसके बाद साल 2015 में चीन में इस पॉलिसी में बदलाव किया और एक जगह दो बच्चे पैदा करने की अनुमति दे दी। इसके बदलाव का मुख्य कारण यह था कि धीरे धीरे चीन का कामगर जनसंख्या कम होने लगी थी जिसको देखते हुए चीन इस पॉलिसी में बदलाव किये। भारत में जनसंख्या वृद्धि का मुख्य कारण है भारत के गावो में शिक्षा का अभाव, जिसके कारण लोग जनसंख्या वृद्धि को लेकर जागरूक नहीं है और न वे परिवार नियोजन पर ध्यान देते है। भारत में जनसंख्या वृद्धि के कारण ही देश में भुखमरी, भिखारी और बेघर लोगो की संख्या बहुत ही ज्यादा है। इसके अलावा देश में सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी की है क्योकि देश की जनसंख्या का बड़ा हिस्सा जवान है और बेरोजगार है। लेकिन अब भारत सरकार इस मामले गंभीर रूप से सोचने की आवश्यकता है ताकि देश में जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रत किया जा सके।

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