September 26, 2021

वृतांत – Vritaant

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क्या तीन में से दो राउंड जितने के बाद भी जान बूझकर मैरी कॉम को कम स्कोर दिया गया ? मैरी कॉम की टोक्यो ओलिम्पिक में हार बनी विवादस्पद

जापान के टोक्यो में चल रहे ओलिंपिक में दुनिया के सभी देशो द्वारा विभिन्न खेलो में हिस्सा लिया जा रहा है। हार किसी खिलाडी का यह सपना होता है कि वह ओलिम्पिक में अपने देश के लिए मैडल जीते। भारत से भी सभी खेलो में ओलिंपिक में कई खिलाड़ियों द्वारा हिस्सा लिया जा रहा है। इनमे भारत की सबसे दिग्गज महिला मुक्केबाज मैरी कॉम भी हिस्सा ले रही है। यह मैरी कॉम का आखरी ओलिंपिक है और इस बार उन्होंने भारत के लिए टोक्यो ओलिंपिक में मैडल लाने के लिए पूरी मेहनत भी थी और उन्हें अपने ऊपर पूरा भरोसा था कि इस बार वे भारत के लिए मैडल जरुरी जीतकर लाएंगी। लेकिन दो राउंड जितने के बाद भी तीसरे राउंड के बाद मैरी कॉम को विजेता घोषित नहीं किया गया और वे हार के साथ टोक्यो ओलिंपिक से बाहर हो गयी। लेकिन यह सुनकर सबको बहुत अजीब लगता है कि आखिर दो राउंड जितने के बाद भी मैरी कॉम को विजेता क्यों नहीं बनाया गया। टोक्यो ओलिंपिक में मुक्केबाजी के जजों द्वारा लिया गया यह फैसला इतना ज्यादा विवादस्पद और हैरान करने वाला था कि मैरी कॉम इस मैच में हार गयी गयी। मैच के बाद खुद मैरी कॉम को यह विश्वास था कि वे यह मैच जीत चुकी है लेकिन जब उनके कोच द्वारा उन्हें कहा गया कि मैरी तुम कोई बात नहीं लेकिन मेरे लिए तुम ही विजेता हो। अपने कोच की यह बार सुनकर मैरी कॉम को एहसास हुआ कि उनका ओलिंपिक का सफर अब खत्म हो चूका है। लेकिन आखिर ऐसा क्यों हुआ कि कोई खिलाडी शुरू के दो राउंड जितने के बाद भी हार जाये ? क्या जजों द्वारा लिया गया निर्णय सही था या जानबूझकर मैरी को कम स्कोर दिया गया ?

मैरी कॉम दुनिया की एकलौती ऐसी महिला बॉक्सर है जो 6 बार विश्व विजेता बन चुकी है। पहली सात विश्व मुक्केबाजी प्रतियोगिताओ में सभी में मैडल लाने वाली दुनिया की एकलौती महिला है। अंतराष्ट्रीय मुक्केबाजी संघठन ने उन्हें दुनिया की नंबर 1 मुक्केबाज का ख़िताब दिया है। इसके अलावा मैरी कॉम को पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया है। मैरी कॉम ने 2012 के ग्रीष्म ओलिंपिक में भारत के लिए मैडल जीता था और इस साल भारत के 130 करोड़ लोगो को उम्मीद थी कि इस बार भी वे भारत के लिए टोक्यो ओलिंपिक में मैडल जरूर जीतेंगी। मैरी कॉम अभी 38 साल की है और उन्होंने साल 2019 में घोषणा की थी कि 2021 के टोक्यो ओलिंपिक उनका आखरी ओलिंपिक होगा। ऐसे में मैरी कॉम का सपना था कि वे मुक्केबाजी में भारत के लिए टोक्यो ओलिंपिक में गोल्ड मैडल जीतकर लाये और उसके बाद मुक्केबाजी से सन्यास ले लेकिन उनका यह सपना उनकी हार के साथ अधूरा रह गया। टोक्यो ओलिंपिक में प्रे क्वाटर फाइनल में उनका सामना कोलंबिया की इंग्रिड वेलेंशिया से हुआ और खराब किस्मत, हैरान कर देने वाले फैसले और अस्पष्ट निर्णय के कारण हमारी विजेता मुक्केबाज मैरी कॉम ओलिंपिक से बाहर हो गयी।

इस बार कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए मैच रेफरी द्वारा विजेता का हाथ ऊपर नहीं किया गया बल्कि विजेता का नाम और उनकी जर्सी के रंग की घोषणा की गयी। मैच में पांच जज थे और मैच के तीन राउंड थे। मैरी कॉम मैच के बाद पूरी तरह से संतुष्ट थी कि वे ही विजेता बनेगी क्योकि उन्होंने तीन में दो राउंड जीत लिए थे। पहले राउंड में पांच में से चार जजों ने वेलेंशिया के पक्ष में फैसला दिया। हार राउंड में जजों द्वारा अलग अलग स्कोर दिया जाता है और इन्ही स्कोर्स का योग करके विजेता की घोषणा की जाती है। अगर हम इन स्कोर्स को देखे तो ये बहुत ही पास पास है और मैरी कॉम को वेलेंशिया से कुछ ही कम स्कोर दिया गया जिसकी वजह से वे मैच हार गयी। मैरी कॉम ने खुद इस बात की पुष्टि की कि पहले राउंड में जजों द्वारा एक को छोड़कर सभी ने वेलेंशिया के पक्ष में निर्णय लिया जबकि पहले राउंड में ऐसी कोई फाइट हुई ही नहीं थी, उसके बाद अगले दो राउंड मैरी कॉम ने जीते इसके बावजूद मैरी कॉम यह मैच हार गयी। ऐसे में कई लोगो को लगता है कि यह बहुत ही खराब निर्णय था और यह जानबूझकर लिया गया। ओलिंपिक में कोई भी खिलाडी जजों के फैसले के खिलाफ नहीं जा सकता है लेकिन मैरी कॉम इस फैसले को चुनौती जरूर देंगी। चाहे मैरी कॉम इस बार देश के लिए टोक्यो ओलिंपिक में मैडल लाने में असफल रही लेकिन फिर वे देश की एक चैंपियन खिलाडी है और पुरे देश को उन पर गर्व है।

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