September 26, 2021

वृतांत – Vritaant

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जानिए भगवान श्री कृष्ण के जीवन से जुड़े ऐसे किस्से जो हमे जीवन की सही राह दिखाते है

भगवन श्री कृष्ण के जीवन की कहानियो से आज भी हम जीवन की सही राह सिख सकते है। कई लोगो के मन में यह सवाल आता है कि आज के ज़माने में भी हमारी परेशानियों का हल इन पुरानी कहानियो से निकल सकता है ? तो इसका जवाब है हाँ। हम सभी बचपन से श्री कृष्ण से जुड़े हुए है क्योकि हम सभी बचपन में श्री कृष्ण की तरह ही नटखट और शैतान होते थे और हमारी दादी या नानी हमे बाल कृष्ण कहकर बुलाती थी। इसके अलावा हमने बचपन से ही श्री कृष्ण के जीवन की कई कहानिया सुनी है जिनसे हम जीवन की हर परिस्तिथि का मुकाबला करना सिख सकते है।

बचपन में श्री कृष्ण द्वारा मिटटी खाने पर उनकी माता ने उनको डाटते हुए मुँह खोलने को कहा और जब श्री कृष्ण ने अपना मुँह खोला तो उनकी माता को उनके मुँह में पूरा ब्रह्माण्ड नजर आया। हमने बचपन से यह कहानी बहुत बार सुनी है लेकिन यह कहानी हमे क्या सिखाती है ? इस कहानी से हम सीख सकते है कि कोई आयु में बड़ा होने से वह ज्ञानी नहीं हो जाता है। कई बार हमे जाने अनजाने में छोटे बच्चे भी कई ऐसी बाते सीखा देते है जो हमे सोचने पर मजबूर कर देती है। जो व्यक्ति यह सोच लेता है कि यदि वह किसी से बड़ा है तो उसे सब पता है और ऐसा करके वह अपने विकास पर रोक लगा देता है और आगे नहीं बढ़ पाता है। भगवान श्री कृष्ण बचपन से ही बहुत शैतान और नटखट थे। वे हमेशा दुसरो को बहुत ही परेशान किया करते थे और माखन चुरा कर खाया करते थे। लेकिन जब इंद्र ने क्रोधित होकर  वृंदावन में तेज बारिश की तो श्री कृष्ण ने अपनी छोटी ऊँगली पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया और पुरे गांव वालो को उनके निचे पनाह दी। श्री कृष्ण की यह कहानी हमे सिखाती है कि हम घर चाहे कितने लड़ते झगते हो लेकिन जब हमारे परिवार पर मुसीबत आती है और हम सब एक साथ होकर उस मुसीबत से लड़ते है और उसका सामना करते है। आज भी श्री कृष्ण से हमे अपने लोगो के लिए मुसीबत में अपने समाज या परिवार के काम आना सीख सकते है।

भगवान श्री कृष्ण जब गोपियों का माखन चुरा कर खाते थे तो गोपियों ने माखन को उनकी पहुंच से दूर रख दिया ताकि वे माखन तक न पहुंच पाए। लेकिन वे अपने दोस्तों के कंधे पर चढ़ कर वहां तक पहुंच जाते थे। यह किस्सा हमे सिखाता है कि जो काम हम अकेले में नहीं कर पाते वो साथ मिलकर करने से आसानी से किया जा सकता है। यानि हम एक साथ मिलकर मुश्किल से मुश्किल काम को आसान बना सकते है और आज के समय में हमे हर मुसीबत को साथ मिलकर हराने की जरुरत है। असली दोस्ती क्या होती है यह हमे श्री कृष्ण के जीवन से सिखने को मिलती है। श्री कृष्ण के सबसे खास दोस्त सुदामा थे और वे बचपन में साथ रहते थे। सुदामा एक गरीब ब्राह्मण थे जबकि श्री कृष्ण राजा थे। जब कई वर्षो बाद सुदामा श्री कृष्ण से मिलने उनके राज्य में जाते है तो श्री कृष्ण उन्हें पहले जैसा ही सम्मान देते है और गले लगा लेते है। श्री कृष्ण सुदामा को अपनी बराबरी का दर्जा देते है और अपनी पुरानी दोस्ती को कभी नहीं भूलते। आज के समय में हमे श्री कृष्ण से मित्रता का सही मतलब सिखने की जरुरत है। दोस्ती में कोई बड़ा या छोटा नहीं होता है बल्कि दोस्ती में हमेशा बराबरी का दर्जा दिया जाता है चाहे हमे कितने ही बड़े मुकाम पर क्यों न हो। हमे दोस्तों से हमेशा बराबरी वाला व्यवहार करना चाहिए।

एक बार श्री कृष्ण ने गोपियों के साथ रासलीला खेलना चाहा। लेकिन जब समय आया तो श्री कृष्ण वहां थे ही नहीं। गोपियों को समझ नहीं आया कि कृष्ण उनसे वादा करके के कहा चले गए ? लेकिन जब गोपियों ने आंख बंद की तब श्री कृष्ण उन्हें उनके साथ ही दिखे क्योकि वे हर गोपी के साथ थे। यानि श्री कृष्ण गोपियों के मन में बेस हुए थे। इस कहानी से हमे सिखने को मिलता है कि हम मन की शांति को बाहर की दुनिया में ढूंढते है जबकि हम हमारे मन में कभी नहीं झाकते है। श्री कृष्ण इससे हमे सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण सीख देते है और वो है खुद से प्यार करना। ऐसे ही श्री कृष्ण के जीवन के कई किस्से है जो हमे जीवन की राह दिखाने का काम करते है। आज के समय में हमे इन्ही पुरानी कहानियो की आवश्यकता है जो हमारी हर परेशानी का हल हमे दे सकती है ।

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