September 26, 2021

वृतांत – Vritaant

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जानिए इंफोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति और सुधा मूर्ति की प्रेम कहानी के बारे, ऐसी बाते जो आज हर प्रेमी युगल को सीखनी चाहिए

हमने आज तक कई प्रेम कहानिया देखी और सुनी है लेकिन भारत का एक ऐसा प्रेमी युगल भी है जिनकी प्रेम कहानी सभी कहानियो से बहुत ही अलग है। ये कहानी है भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी इंफोसिस के संस्थापक नारायण और सुधा मूर्ति की। इनकी प्रेम कहानी एक दूसरे से प्रेम के साथ साथ देश और अपने काम से प्रेम की यह कहानी बाकि सबसे अलग हो जाती है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान बनाकर भेजता है और वे धरती पर आकर पुरे होते है। ऐसे ही नारायण मूर्ति और सुधा मूर्ति का जन्म भी एक दिन पहले और बाद में है। इन दोनों की प्रेम कहानी ने भारत को इंफोसिस जैसी कंपनी दी है जो आज भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी है। यह एक ऐसी कंपनी है जो मात्र दस हजार रूपए से शुरू होती है और आज 90 बिलियन डॉलर से भी ज्यादा की कीमत रखती है। आज इस कंपनी में ढाई लाख से भी अधिक संख्या में कर्मचारी काम करते है। आज इंफोसिस का दुनिया की सबसे बड़ी आईटी कम्पनियो में नाम है आता है और यह सब संभव हुआ है नारायण मूर्ति और सुधा मूर्ति की मेहनत और विश्वास के कारण। आज नारायण मूर्ति एक अरबपति है और एक सफल इंसान है लेकिन एक समय ऐसा भी था जब नारायण मूर्ति एक असफल आदमी थे। इंफोसिस से पहले नारायण मूर्ति ने सोफ्ट्रॉनिक्स नाम की कंपनी शुरू की थी लेकिन वह कंपनी सफल नहीं हो पायी। नुकसान होने के कारण नारायण मूर्ति ने कंपनी को बंद कर दी और परिवार को सँभालने के लिए नौकरी शुरू कर दी। इसके बाद कुछ साल तक नौकरी करने के बाद नारायण मूर्ति ने फिर से नौकरी छोड़ दी और अपने 6 दोस्तों के साथ इंफोसिस की शुरुवात की।

ऐसा कदम उठाने पर किसी भी आदमी का परिवार परेशान हो जाता है और वे उन्हें ऐसा करने से रोकते है। लेकिन नारायण मूर्ति की पत्नी सुधा मूर्ति ने नारायण मूर्ति इसमें पूरा साथ दिया और उन पर विश्वास जताया। सुधा मूर्ति खुद उस समय काम करती थी और कंपनी के लिए निवेश और बच्चो को पालने की जिम्मेदारी भी उठाती थी। शादी से पहले भी सुधा जी एक एक रूपए का हिसाब रखती और वे खर्चे को आधा आधा बाँट लेते थे। उन्होंने अपनी शादी का खर्च भी आधा आधा बाँट लिया था। हमारे समाज में माना जाता है कि एक आदमी ही परिवार को पाल सकता है लेकिन इस युगल ने सभी मान्यताओं को झूठा साबित कर दिया। साल 1981 में जब इंफोसिस की शुरुवात हुई थी तब भारत में व्यवसाय करना आसान नहीं था क्योकि उस कंप्यूटर तो दूर की बात है लेकिन एक फ़ोन लेने के लिए भी एक साल तक रुकना पड़ता था। हालाँकि इन्फ़ोसिस एक सॉफ्टवेयर कंपनी थी लेकिन पहले दो साल तक कंपनी ने बिना कंप्यूटर के काम किया। पहले आठ साल तक इंफोसिस को कोई  भी लाभ नहीं हुआ और इसकी वजह से कंपनी के कुछ साझेदारों ने कंपनी को छोड़ दिया। लेकिन नारायण मूर्ति को अपना लक्ष्य साफ नजर आ रहा था। उनका मानना था कि भारत के आईटी क्षेत्र में बहुत क्षमता है और हमारे इंजीनियर्स सबसे अच्छे है। इंफोसिस ने ईसॉप्स देकर अपने कर्मचारियों को वेतन दिया यानि उन्हें कंपनी के कुछ हिस्से का मालिकाना हक़ दिया जिसके बाद कंपनी ने करीब 18 हजार कर्मचारियों को करोड़पति बनाया।

देखते देखते इंफोसिस आसमान चुने लगी और भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी बन गयी। सुधा मूर्ति और नारायण मूर्ति भारत के अरबपतियों में गिने जाने लगे। लेकिन अरबपति होने बावजूद उन्होंने कभी भी अपने जीवन जीने का तरीका नहीं बदला और आज भी वे एक माधयम वर्ग के परिवार की तरह ही जीवन जी रहे है। इंफोसिस को बुलंदियों पर पहुंचाने का काम दोनों युगल की साझेदारी ने किया। दोनों ने अपनी अपनी खूबियों को काम लेकर और मिलकर इंफोसिस को भारत की सबसे बड़ी कंपनी बनाया। नारायण मूर्ति और सुधा मूर्ति दोनों की अलग अलग खूबियों का अंतर उन्हें कमजोर नहीं बनाता बल्कि उन्होंने दोनों की खूबियों के इंफोसिस को इस मुकाम पर पहुंचाया है। सुधा मूर्ति आज भारत की जानी मानी लेखिका भी है। उन्होंने 50 की आयु के बाद से अंग्रेजी भाषा में लिखना शुरू किया था। इससे पहले वे कन्नड़ भाषा में ही लिखती थी लेकिन जब उन्होंने अंग्रेजी में लिखने का जोखिम लिया तो नारायण मूर्ति ने उनका पूरा साथ दिया और उनके सहयोगी बने। सुधा मूर्ति ने हर परिस्थिति में नारायण मूर्ति का साथ दिया और उन पर विश्वास बनाये रखा। दोनों ने एक दूसरे को सहारा देते हुए और एक दूसरे पर विश्वास करते हुए कामयाबी को हासिल किया। आज के समय में हर प्रेमी युगल को नारायण मूर्ति और सुधा मूर्ति की प्रेम कहानी से सीखना चाहिए और असली प्रेम  का मतलब समझना चाहिए।

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