September 26, 2021

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प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने की राष्ट्रिय हाइड्रोजन मिशन की घोषणा, जानिए इस मिशन की मुख्य बाते

हाल ही में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 75वे स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रिय हाइड्रोजन मिशन की घोषणा की। इस राष्ट्रिय हाइड्रोजन मिशन का मकसद यह है कि भारत हाइड्रोजन के उत्पादन और निर्यात में अव्वल बने। इस मिशन के अनुसार भारत को हाइड्रोजन का उपयोगकर्ता ही नहीं बल्कि हाइड्रोजन का निर्यातक बनाना भी है। प्रधान मंत्री ने इस बात ध्यान दिलाया कि वर्तमान में जलवायु परिवर्तन के मद्देनजर यह मिशन बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसके अलावा प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घोषणा के दौरान ऊर्जा सुरक्षा के बारे में भी कुछ महत्वपूर्ण बाते कही। प्रधान मंत्री ने कहा कि भारत वर्तमान में ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर नहीं है क्योकि भारत को ऊर्जा के लिए कई देशो पर निर्भर होना पड़ता है। प्रधान मंत्री मोदी के अनुसार भारत को ऊर्जा के लिए आत्मनिर्भर बनने के लिए राष्ट्रिय ऊर्जा मिशन बहुत ही उपयोगी साबित होगा। इस घोषणा के दौरान प्रधान मंत्री ने पर्यावरण सुरक्षा के मुद्दे पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जलवायु परिवर्तन के कारण वैश्विक तापमान की समस्या बहुत ही ज्यादा बढ़ गयी है और इसके लिए जीवाश्म ईंधन का अधिक उपयोग करना भी जिम्मेदार है। इस मिशन के तहत जीवाश्म ईंधन के उपयोग को कम कर पर्यावरण सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जायेगा। इससे पहले साल 2021-22 के राष्ट्रिय बजट के दौरान भी राष्ट्रिय हाइड्रोजन मिशन के बारे में चर्चा की गयी थी और इसी को आधार बनाते हुए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मिशन की घोषणा की है।

इसके अलावा भारत अब जीएचसीओ की तरफ भी अधिक ध्यान दे रहा है जिसका मतलब है ग्रीन हाइड्रोजन कन्सप्शन ऑब्लिगेशन। यानि इसके तहत जो कम्पनिया पेट्रोलियम के क्षेत्र में कार्य कर रही या उर्वरक के क्षेत्र में कार्य कर रही है, ऐसी कम्पनिया हाइड्रोजन ख़रीदे और इसको उपयोग में ले। इसके तहत हाइड्रोजन को ईंधन के रूप में उपयोग करने के चलन को पूरा किया जा सकता है। साथ ही भारत सरकार अब हाइड्रोजन ब्लेंडिंग पर ध्यान दे रही है। इसके तहत सम्पीड़ित प्राकृतिक गैस के साथ हाइड्रोजन गैस का उपयोग किया जाये तो यह और भी ज्यादा फायदेमंद साबित होगा और यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है। हाइड्रोजन गैस एक रंगहीन और गंधहीन गैस है। ब्रह्माण्ड में हाइड्रोजन गैस प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। सूरज भी हाइड्रोजन और हीलियम का एक बहुत ही बड़ा गैस का गोला है। लेकिन अगर पृथ्वी पर हाइड्रोजन गैस की बात करे तो यह स्वतंत्र रूप से नहीं पाया जाता है जबकि यह यौगिक के रूप में पाया जाता है जैसे जल और हाइड्रो कार्बन आदि। हाइड्रोजन को ईंधन के रूप में काम में लेने के लिए सबसे पहले इन यौगिकों से हाइड्रोजन को अलग किया जाता है। इसके लिए जो विधि काम में ली जाती है उसे इलेक्ट्रोलाइसिस कहा जाता है।

हाइड्रोजन को ईंधन के रूप में काम में लेने के लाभों की बात की जाये तो यह नवीकरणीय स्त्रोत है। यानि इसे पुनः उपयोग में लिया जा सकता है जिससे यह हमेशा उपलब्ध रहता है। इसके इस्तेमाल से कोई भी हानिकारक गैसों का उत्सर्जन नहीं होता है जैसे कार्बन, कार्बिन डाई ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड आदि जिससे इसके इस्तेमाल से पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होगा। इसके अलावा हाइड्रोजन की कम मात्रा भी हमे बहुत अधिक ऊर्जा देने में सक्षम है। यानि यह कहना गलत नहीं होगा कि हाइड्रोजन कभी न ख़त्म होने वाला ईंधन है। इस मिशन की चुनौतियों की बात की जाये तो सबसे बड़ी चुनौती है हाइड्रोजन का दोहन। यानि हाइड्रोजन को ईंधन के रूप में उपयोग करने के लिए इसे अलग करने की प्रक्रिया आसान नहीं है क्योकि इसके दोहन की प्रक्रिया में भी ऊर्जा की खपत बहुत अधिक होती है जिससे यह अधिक महंगी हो जाती है। इसके अलावा हाइड्रोजन के दोहन के लिए उपयोग में आने वाले उपकरणों का सुगमता से उपलब्ध न होना भी एक बड़ी चुनौती रहेगी। इसके अलावा लागत, सुरक्षा और इसका भण्डारण भी इस मिशन की बड़ी चुनौतियां है। लेकिन विज्ञानं के क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों से ये सभी चुनौतियां भी दूर हो जाएगी और भविष्य में हम आसानी से हाइड्रोजन को ईंधन के रूप में उपयोग कर सकेंगे।

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