September 26, 2021

वृतांत – Vritaant

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इस बार एक टोक्यो ओलंपिक्स में रहा भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन, नीरज चोपड़ा ने भारत को पहली बार एथलेटिक्स में दिलाया स्वर्ण पदक

जब से नीरज चोपड़ा ने भारत के लिए जेवलिन थ्रो में भारत को स्वर्ण पदक दिलाया है तब से नीरज चोपड़ा को द गोल्डन बॉय ऑफ़ इंडिया के नाम से बुलाया जाने लगा है। नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलिंपिक में भारत के लिए एथलेटिक्स में पहली बार स्वर्ण पदक जीतकर एक नया इतिहास रच दिया। 13 साल बाद ओलंपिक्स में भारत के झंडा ऊँचा हुआ और 13 साल बाद भारत का कोई खिलाडी सबसे ऊपर वाले पायदान पर खड़ा था। इसके अलावा 13 साल बाद ओलंपिक्स में हमारा राष्ट्रगान सुनाई दिया। ओलंपिक्स में यह नजारा देखकर हर कोई भावुक हो गया। इस साल हमारे लिए ओलंपिक्स की शुरुवात मीरा बाई के रजत पदक द्वारा हुई और खत्म हुई नीरज चोपड़ा के स्वर्ण पदक के साथ। इस बार भारत ने टोक्यो ओलंपिक्स में कुल 7 मैडल जीते और यह ओलिंपिक भारत का अब तक सबसे बेहतरीन और सफल ओलंपिक्स रहा। ओलंपिक्स एक ऐसा इवेंट है जिसमे दुनिया भर के कई देशो से बड़े बड़े खिलाडी भाग लेते है। इस इवेंट में पहुंचना भी किसी सफलता से कम नहीं है। इस साल भारत से अब तक के सबसे ज्यादा खिलाड़ियों ने ओलंपिक्स के लिए क्वालीफाई किया। कुछ ही महीनो पहले की बात की जाये तो भारत कोरोना महामारी के प्रकोप से गुजर रहा था, इसके बावजूद भारत से 128 खिलाडी 18 अलग अलग खेलो में ओलंपिक्स में पहुंचे। इससे इस बात का पता चलता है कि भारत ने ओलंपिक्स के पहले से कई ज्यादा सुधार किया है जो किसी सफलता से कम नहीं है।

भारत का राष्ट्रिय खेल हॉकी है और भारत ने 1928 से 1980 तक के समय में ओलंपिक्स में हॉकी में 8 स्वर्ण पदक जीते थे। लेकिन इसके बाद भारतीय हॉकी टीम एक भी पदक जीत  नहीं पायी और 40 सालो बाद यह सूखा भी खत्म हो गया। इस बाद भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने टोक्यो ओलंपिक्स में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। इससे इस बात का पता चलता है कि लोगो में बदलाव आ रहा  है और लोग अब हॉकी के महत्व को भी समझने लगे है। इस बार के टोक्यो ओलंपिक्स में भारत से पहली बार किसी महिला तलवार बाज ने क्वालीफाई किया। भारत की ओर से भवानी देवी ने टोक्यो ओलंपिक्स में मैच जीतकर लोगो को नए खेल से रूबरू करवाया। इसके अलावा भारत में डिसकस थ्रो के बारे में बहुत ही कम लोग जानते है लेकिन भारत की कमल प्रीत सिंह टोक्यो ओलंपिक्स में डिसकस थ्रो में फाइनल में पहुंची और छठे पायदान पर आयी और पुरे देश को एक उम्मीद दी।

भारत में गोल्फ के बारे भी कोई चर्चा नहीं होती है लेकिन हमारी ग्लोफर अदिति अशोक केवल दो शॉट से पीछे रह गयी। ओलंपिक्स से पहले दुनिया के गोल्फर्स में उनका 200वा स्थान था लेकिन फिर भी अदिति अशोक ओलिंपिक पदक से केवल दो शॉट पीछे रह गयी और चौथे स्थान पर आयी। क्या आप सोच सकते है कि अगर दो शॉट और बेहतर होते तो अदिति स्वर्ण पदक जीत सकती थी। इस बार टोक्यो ओलंपिक्स में भारत की पुरुष रिले टीम ने एशिया के रिकॉर्ड तोड़ दिया। हालाँकि हमारी टीम फाइनल में नहीं पहुंच सकी लेकिन ओलंपिक्स में एशिया का रिकॉर्ड तोडना किसी सफलता से कम नहीं है। फाइनल में केवल 8 टीम जाती और हमारी टीम ९वे स्थान पर रही। इस बार के ओलंपिक्स में यह देखने को मिला कि कैसे हार को जीत में बदला जाता है। ऐसा ही कुछ कारनामा रवि दहिया ने करके दिखाया। रवि दहिया आखिर मिनट तक 2-9 से पीछे थे लेकिन रवि दहिया ने अपने विरोधी को ऐसा दाव लगाया कि उन्होंने यह मैच जीत लिया। इस दाव के दौरान उनके विरोधी ने उनकी भुजा पर काट लिया लेकिन फिर भी रवि दहिया ने अपने विरोधी के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया और महानता का परिचय दिया। सभी बातो को देखा जाये तो इस बार का ओलंपिक्स भारत के लिए सबसे सफल ओलंपिक्स रहा और इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि आने वाले ओलंपिक्स में अब भारत और भी सुधार  करता जायेगा।

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