September 26, 2021

वृतांत – Vritaant

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भगवद गीता के तीन ऐसे सबक जो हर विद्यार्थी को अपने जीवन में ग्रहण करने चाहिए

आज पूरी दुनिया यह मानती है कि भगवद गीता कोई धार्मिक किताब नहीं है बल्कि यह किताब हमे जीवन का मार्गदर्शन प्रदान करती है। दुनिया का ऐसा कोई सवाल नहीं है जिसका जवाब हमे भगवद गीता में न मिले।  हजारो साल पुरानी होने के बावजूद भगवद गीता आज भी हमे जीवन की रह दिखाने का काम करती है और आज भी यह जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण मार्गदर्शक है। लेकिन एक सवाल यह आता है कि क्या भगवद गीता से आज के समय के विद्यार्थियों के लिए भी महत्वपूर्ण है ? आज समय में जब विद्यार्थीओ का जीवन इंटरनेट और मोबाइल फ़ोन की दुनिया से घिरा हुआ है तब भी क्या भगवद गीता से विद्यार्थियों को कुछ सिखने को मिल सकता है ? भगवद गीता आज भी सभी के उतनी ही कारगर है जितना पहले थी। भगवद गीता से विद्यार्थी तीन मुख्य सबक ले सकते है जिनसे वे अपने विद्यार्थी जीवन को और बेहतर बना  सकते है।

1 : अर्जुन की तरह कैसे बने : आज के समय में विद्यार्थी किसी भी परीक्षा से पहले बहुत ही चिंता में होते है और उन्हें समझ नहीं आता है कि वे कैसे इस परीक्षा का सामना करे। महाभारत में भी युद्ध शुरू होने से पहले अर्जुन बहुत ही चिंतित थे और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वे सही कर रहे है या गलत ? इसके अलावा उन्हें यह दर था कि वे कभी भी ये युद्ध नहीं जीत सकते है क्योकि दूसरी तरफ उनके गुरु द्रोणाचार्य और भीष्म पितामह थे। अर्जुन का मानना था कि उन्होंने जो कुछ भी सीखा है उनके गुरु से सीखा है फिर वे उनसे कैसे जीत सकते है और युद्ध के शुरू होने से पहले ही अर्जुन ने हार मान ली थी। लेकिन तब भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें समझाया कि दुनिया में ज्ञान से बड़ा कुछ नहीं होता है और ज्ञान ही सबसे बड़ी ताकत है। द्रोणाचार्य अर्जुन के गुरु थे लेकिन वह केवल द्रोणाचार्य के ज्ञान से ही दुनिया सबसे बड़ा तीरंदाज नहीं बना था बल्कि उन्होंने अपने पुरे जीवन में हर एक घटना से कुछ नया सीखा था। ऐसे आज के समय में विद्यार्थियों के लिए पढाई एक ज्ञान है और परीक्षा एक युद्ध जिसको विद्यार्थी अपने ज्ञान से आसानी से जीत सकते है जो हमे खुद पर और हमारी परीक्षा दोनों पर विजय प्राप्त करवाता है।

2 विचलित होने से कैसे बचे : आज के समय में सभी लोग किसी न किसी तरह से विचलित है। लॉक डाउन के समय में विद्यार्थी जिस फ़ोन से ऑनलाइन पढाई करते थे उसी फ़ोन से वे विचलित हो जाते है और समय बर्बाद करने लगते है। लेकिन फ़ोन से होने वाली समस्या का समाधान भी गीता में दिया गया है। भगवान कृष्ण कहते है कि हम सब यह सोचते है कि हम एक ही तरह के इंसान है लेकिन हमारे अंदर भी अलग अलग तरह के गुण होते है। कुछ ऐसी चीज़े होती है जो हमे केवल थोड़े समय के लिए ही ख़ुशी देती है और हमे उनके बारे में पता है होता है कि ये ख़ुशी हमारे लिए ज्यादा देर नहीं रुकने वाली। लेकिन फिर हमे इनकी लत लग जाती है जैसे धूम्रपान करना, फ़ोन का उपयोग ज्यादा करना या सोशल मीडिया आदि। कुछ ऐसे काम होते है जो हमारे लिए जरुरीतो होते है लेकिन उन्हें करना हमारे लिए कठिन होता है जैसे रोज़ सुबह जल्दी उठना, किसी कठिन विषय की क्लास में ध्यान लगाना या किसी अच्छे मैच को छोड़कर परीक्षा की तैयारी करना ये सभी हमारे लिए बहुत ही कठिन होता है। लेकिन गीता हमे सिखाती है कि भले ही ऐसे काम करने में कठिनाई होती है लेकिन अगर हमे इन्ही को अपने जीवन में बार बार करने लगते है तो कुछ समय बाद यही हमे अच्छे परिणाम देते है। यानि गीता के अनुसार जिस भी काम को करने में हमे कठिनाई हो उसे हमे रुचिकारक तरीके से करना चाहिए जैसे पढाई।

3 असफलता का सामना करना : हमारी शिक्षा व्यवस्था हमे सब सिखाती है लेकिन असफलता का सामना कैसे करना है ये कोई भी सिखाता। हमे हर कोई यह बताता है कि अच्छे मार्क्स आने पर हमारे लिए कौनसे मौके है और हमे आगे क्या कर सकते है, लेकिन हमे ये कोई नहीं सिखाता कि यदि हमे हमारी उम्मीद के अनुसार परिणाम न मिले तो क्या करना चाहिए ? यह केवल पढाई और शिक्षा में ही नहीं बल्कि हमारे जीवन की असफलता में भी लागू होता है। आज के समय में हम एक ऐसी दुनिया में जी रहे है जहा पर हमारी हर बात में दुसरो से तुलना की जाती है। हमारे घरवालों को भी  इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि हमे कितने मार्क्स मिले बल्कि उन्हें इस बात से पड़ता है कि हमे दुसरो से कम मार्क्स मिले या ज्यादा। लेकिंन भगवत गीता में श्री कृष्ण ने अर्जुन को समझाया कि परिणाम केवल तुम्हारी कोशिशों पर ही निर्भर नहीं करता है बल्कि इसके लिए अन्य चीज़े भी जिम्मेदार होती है जिन पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता है तो केवल अच्छे परिणाम के लिए ही काम मत करो बल्कि कर्म इसलिए करो क्योकि यही तुम्हारा धर्म है और तुम्हारा रास्ता है। इसलिए विद्यार्थियों को भगवद गीता यह सिखाती है कि कर्म करो और फल की इच्छा मत करो। तुम्हरे अच्छे कर्मो का फल तुम्हे एक न एक दिन जरूर मिलेगा।

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