September 26, 2021

वृतांत – Vritaant

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जानिए आखिर किन कारणों से वोडाफोन आईडिया भारत में बंद होने की कगार पर है

भारत में वोडाफोन आईडिया की हालत बहुत ही खराब हो चुकी है और यह कंपनी अब भारत में बंद होने की कगार पर आ गयी है। हाल ही में वोडाफोन आईडिया को इस साल की पहली तिमाही में 7,319 करोड़ रूपए का घाटा हुआ है। इस तरह के कंपनी के घाटे की बात करे तो पिछले साल 25 हजार करोड़ रूपए का घाटा देखने को मिला था यानि कि इस बार कंपनी को पिछली बार से कम घाटा देखने को मिला है। लेकिन फिर भी वोडाफोन आईडिया बहुत लम्बे समय से लाभ में नहीं आ पायी है। वोडाफोन के अंतराष्ट्रीय सीईओ के अनुसार भारत में वोडाफोन आईडिया का संचालन करना बहुत ही मुश्किल हो रहा है और कंपनी लाभ कमाने में असफल हो रही है। हाल ही में वोडाफोन आईडिया भारत के सीईओ कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा कि कंपनी में 27 प्रतिशत शेयर आईडिया का है और वे इस शेयर को बेचने को तैयार है यानि कि वोडाफोन आईडिया की हालत भारत में बिलकुल भी ठीक नहीं है। इसके अलावा नए उपभोक्ता जोडने की बात जाये तो कंपनी नए उपभोक्ता जोड़ने में भी असफल हो रही है और इसके विपरीत वोडाफोन आईडिया के उपभोक्ता दिन प्रतिदिन तेजी से कम हो रहे है। वोडाफोन आईडिया के पास भारत में 270 मिलियन उपभोक्ता है लेकिन अब काफी सारे लोग या तो अपनी सिम बंद कर रहे है या दूसरे ऑपरेटर पर स्विच कर रहे है। यह बहुत ही आश्चर्य की बात है कि एक ज़माने में भारत की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी हुआ करती थी और आज कंपनी के भारत में बंद होने की नौबत आ गयी है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि कंपनी लगातार घाटे में चली गयी ?

इस कंपनी की शुरुवात होती है हच के साथ, हच एक टेलीकॉम कंपनी थी जिसमे कई देश विदेश की कंपनियों ने निवेश किया हुआ था। इसके बाद साल 2009 में हच को वोडाफ़ोन हच को वोडाफोन द्वारा अधिग्रहण कर लिया गया इसके बाद यह भारत में वोडाफोन नाम से ही देखने को मिलती है। साल 2016 तक वोडाफोन भारत की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी थी। इसके अलावा भारत में वोडाफोन और आईडिया की कहानी लगभग समान थी क्योकि लोग सबसे दोनों को इसलिए ज्यादा पसंद करते थे क्योकि दोनों कम्पनियो का नेटवर्क बहुत ही अच्छा देखने को मिलता था हालाँकि इसके प्लान काफी ज्यादा महंगे हुआ करते थे लेकिन नेटवर्क अच्छा होने के कारण लोग वोडाफोन आईडिया को पसंद करते थे। यही वोडाफोन आईडिया का सबसे बड़ा हथियार था जो कि अन्य कोई कंपनी इतना अच्छा नेटवर्क नहीं दे पाती थी। साल 2016 तक कई टेलीकॉम कम्पनिया भारत में मौजूद थी और सभी कालिंग को लेकर ही प्रतिस्पर्धा थी। यानि पहले कम्पनिया सस्ती कॉल दर देने के लिए लड़ती थी और ऐसे में सभी कालिंग को लेकर कई अलग अलग सस्ते प्लान द्वारा लोगो को आकर्षित करती थी। लेकिन 2016 में भारत में टेलीकॉम के क्षेत्र में सबसे बड़ा बदलाव आया जब जिओ ने टेलीकॉम में अपने कदम रखे और एक नयी क्रांति आयी जो डाटा को लेकर थी। जब जिओ का भारत में प्रवेश होता है तो जिओ इस कहानी को पूरी तरह से पलट देता है।

यानि 2016 से पहले कम्पनिया कॉल दर को लेकर लड़ती थी लेकिन जिओ के आने के बाद अब यह लड़ाई  डाटा को लेकर होने लग गयी। जिओ को अच्छे से पता था कि वह कॉल वाले प्लान के साथ भारत में सफल नहीं हो पायेगी इसीलिए जिओ ने डाटा के साथ खेलना शुरू किया लेकिन सिर्फ डाटा के साथ ही नहीं जिओ ने फ्री ऑफर के साथ अपनी शुरुवात की और यह एक ऐसी चीज़ थी जिससे कोई भी कंपनी नहीं लड़ सकती थी। इसी कारण वोडाफोन आईडिया और एयरटेल को काफी ज्यादा नुकसान हुआ था और इसी कारण से 2016 के बाद काफी सारी टेलीकॉम कम्पनिया बंद भी हो गयी। हालाँकि एयरटेल ने जल्द से खुद को बदला और उसने भी जल्द ही भारत में 4G सेवा शुरू कर दी। इसके विपरीत वोडाफोन आईडिया को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ क्योकि कंपनी ने 2G और 3G सेवा में सबसे ज्यादा निवेश किया हुआ था और भारत में 4G सेवा को शुरू करने में वोडाफोन आईडिया को बहुत ज्यादा समय लग गया। इसके अलावा वोडाफोन आईडिया 2G और 3G के साथ भी चल रहा था जिसके कारण कंपनी को तीनो सेवाएं देना बहुत ही महंगा पड़ गया। जबकि जिओ ने केवल 4G सेवा पर ही ध्यान दिया जिसके कारण जिओ को सेवाएं देना ज्यादा महंगा नहीं पड़ा। इसके बाद वोडाफोन आईडिया दोनों आपस में मिल जाते है और वीआई नाम से अपनी सेवा शुरू करते है। लेकिन फिर भी कंपनी लगातार घाटे में जा रही है। इसके अलावा कंपनी पर कर्जा भी बहुत ही ज्यादा है क्योकि वोडाफोन आईडिया अभी तक भी स्पेक्ट्रम की कीमत नहीं चूका पायी है और यह खर्चा लगभग 44 हजार करोड़ रूपए है। सरकार कंपनी से बार बार ये पैसा मांगती है लेकिन कंपनी ने सरकार से समय की मांग की है ताकि कंपनी की हालत ठीक होने पर वह कर्जा चूका सके। लेकिन लगातार घाटा होने के कारण कंपनी की हालत और भी ज्यादा खराब हो गयी है और कंपनी अब बंद होने की कगार पर आ गयी है। अब देखना होगा कि आखिर कंपनी कैसे खुद को जीवित रख पाती है ?

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