September 26, 2021

वृतांत – Vritaant

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तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्ज़ा करने से सबसे ज्यादा फायदा चीन और पाकिस्तान को होगा, जानिए क्या है कारण ?

हाल ही में अफगानिस्तान में लगभग पूरी तरह से तालिबान ने कब्ज़ा कर लिया है। तालिबान ने अफगानिस्तान का पूरा शासन अपने हाथ में ले लिया है और वहा की सरकार और सेना को हटा दिया है। तालिबान के द्वारा अफगानिस्तान पर कब्ज़ा करने के बाद से रोज़ वहा के लोगो पर कई अत्याचार हो रहे है और वहा के लोगो में दहशत का माहौल बना हुआ है। लेकिन अगर बात की जाये कि अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्ज़ा होने से सबसे ज्यादा किसका फायदा होगा ? क्या तालिबान का इसमें कोई फायदा है ? तो इसका जवाब होगा नहीं। क्योकि इस जंग में सबसे ज्यादा फायदा आखिर किसी को होगा तो वह है चीन और पाकिस्तान और यह भारत के लिया बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसा  भी कहा जा सकता है कि यह जंग कोई अचानक नहीं हुई है बल्कि यह एक सोची समझी योजन प्रतीत होती है। अफगानिस्तान में तालिबान का शासन होने से भारत के लिए कई मुसीबते कड़ी हो सकती है।

अफगानिस्तान एक ऐसा देश है जिसे हर कोई जितना चाहता है और इस पर अपना कब्ज़ा करना चाहता है लेकिन इतिहास इस बात का गवाह है कि जो भी ऐसा करने की कोशिश करता है वह एक न एक दिन हार कर ही जाता है। लेकिन इसके बावजूद दुनिया सबसे शक्तिशाली देश अफगानिस्तान में रूचि रखते है। इसकी दो वजह है – पहला अफगानिस्तान की भौगिलिक स्थिति और दूसरा है यहाँ का प्राकृतिक खजाना। अफगानिस्तान की भूमि कई ऐसे खनिजों और तत्वों से भरी हुई है जो बहुत ही कम मात्रा में पृथ्वी पर मौजूद है जिसकी कीमत लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर है। यहाँ पर सबसे ज्यादा सबसे ज्यादा लिथियम के भंडार है जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी बनायीं जाती है। एक तरफ अमेरिका ही अमेरिका अफगानिस्तान को छोड़ रहा था तो तो दूसरी तरफ चीन अफगानिस्तान पर अपनी पकड़ को और मजबूत कर रहा था। चीन ने अन्य गरीब देशो की तरह अफगानिस्तान को भी जरुरी राजनैतिक स्थिरता और आर्थिक सहायता देने की पेशकश की। चीन ऐसे गरीब देशो में कई प्रोजेक्ट्स शुरू करने के नाम पर उन्हें खूब सारा कर्ज देता है और उन्हें अपना गुलाम बना लेता है। ऐसे चीन की नजर अब अफगानिस्तान प्राकृतिक खजाने पर है। भविष्य में चीन वहा पर लिथियम का खनन शुरू कर देगा और उसे चीन में भेजेगा।

इसके लिए चीन में दस साल पहले से ही बेल्ट एंड रोड के साथ तैयारी कर ली थी। इसके लिए चीन को पाकिस्तान का भी साथ मिल रहा है। चीन पाकिस्तान के पेशावर से काबुल तक एक मोटरवे बनाना चाहता है जिसके जरिये अफगानिस्तान से खनन किये गए खनिज चीन में भेज सकेगा। चीन ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद् की बैठक में भारत का विरोध किया लेकिन अफगानिस्तान में सुरक्षा को लेकर चीन ने कुछ भी नहीं कहा। इसके बाद अब हमे कारणों का भी पता चल रहा है। पाकिस्तान के प्रधान मंत्री इमरान खान के अनुसार तालिबान आतंकी उन्हें साधारण लोग लगते है जो हथियार लेकर घूमते है। इसके अलावा इमरान खान तालिबान को बधाई भी दी और कहा कि उन्होंने गुलामी को तोड़ दिया। पाकिस्तान ने हमेशा से अफगानिस्तान में तालिबान का साथ दिया है। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान की आईएसआई तालिबान की हर योजना और गतिविध में साथ देता है। यहाँ तक तालिबान के प्रशिक्षण, उन्हें धन और हथियारों की उपलब्धता भी आईएसआई द्वारा की जाती है। इसके अलावा पाकिस्तान की आईएसआई ने तालिबान के साथ मिलकर एक नया आतंकी संगठन भी बनाया है जिसकी मदद से भारत के अफगानिस्तान में 3 बिलियन डॉलर के निवेश को निशाना बनाया जायेगा और इससे भारत को बहुत ही बड़ा नुकसान हो सकता है। भारत के अफगानिस्तान में लगभग 300 प्रोजेक्ट्स है जिनको तालिबान की मदद से चीन और पाकिस्तान निशाना बना सकते है। इसके अलावा तालिबान का अफगानिस्तान पर कब्ज़ा होने से भारत में आतंकी हमले बढ़ने की भी सम्भावनाये बढ़ सकती है। इन सभी तथ्यों को जानने के बाद हम कह सकते है कि तालिबान को चीन और पाकिस्तान का पूरा साथ मिल रहा है और ये दोनों देश मिलकर भारत के लिए मुश्किलें बढ़ा सकते है।

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