September 26, 2021

वृतांत – Vritaant

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जानिए आखिर तालिबान की कमाई किन किन स्त्रोतों से होती है, अफगानिस्तान में रहते हुए भी तालिबान के पास इतने पैसे आते कहाँ से है ?

हाल ही में अफगानिस्तान में तालिबान का पूरी तह से कब्ज़ा होने के बाद से अफगानिस्तान का माहौल बहुत ही खराब है। लेकिन कई बार हमारे मन में यह सवाल आता है कि आखिर तालिबान की कमाई के स्त्रोत क्या है और आखिर तालिबान के पास इतने पैसे आते कहाँ से है ? देखा जाये तो तालिबान दुनिया सबसे अमीर आतंकवादी संघठन है। हाल ही में सीआईए की रिपोर्ट में बताया गया है कि तालिबान केवल एक अटनाकि संघठन ही नहीं बल्कि एक बहुत ही बड़ा और अमीर आतंकी समूह है। अगर तालिबान की सालाना कमाई की बात की जाये तो तालिबान हर साल लगभग 400 मिलियन डॉलर से 1.5 बिलियन डॉलर तक की कमाई कर लेता है। आखिर इतना पैसा तालिबान के पास आता है कहाँ से है और इससे हमे क्या फर्क पड़ता है ?

तालिबान की कमाई के चार मुख्य कमाई के स्त्रोत है। इनमे से सबसे पहला स्त्रोत है अफीम। अफगानिस्तान दुनिया सबसे बड़ा अफीम उत्पादक देश है। दुनिया में डेढ़ करोड़ से अधिक लोग अफीम का उपयोग करते है और इसके आदि है। अफीम एक गैरकानूनी मादक पदार्थ है जिससे एक बहुत ही महत्वपूर्ण ड्रग बनायीं जाती है जिसे मॉर्फिन कहते है, जो दर्द के संकेतो को रोकने में मदद करती है। दुनिया में अफीम का कारोबार लगभग 65 बिलियन डॉलर का है। दुनिया का 85 प्रतिशत अफीम अफगानिस्तान से आता है। हर साल अफगानिस्तान 3 बिलियन डॉलर केवल अफीम का निर्यात करके कमाता है, जिसमे से 400 मिलियन डॉलर तालिबान के पास जाते है।

तालिबान का दूसरा कमाई का स्त्रोत है टैक्स वसूल करना। तालिबान अफगानिस्तान में पूरी तरह कब्ज़ा करने से पहले भी बहुत ज्यादा टैक्स वसूली करता था। अफगानिस्तान में कई देशो में मिलकर एक रिंग रोड बनाना चाहा ताकि अफगानिस्तान के सभी गावो और शहरो को जोड़ा जा सके। यह रिंग रोड उन जगहों से भी गुजरती थी जहा पर तालिबान का कब्जा था। इस रोड से आने जाने के बदले तालिबान टैक्स की वसूली करता था। इसके अलावा तालिबान अफगानिस्तान में स्कूलों, अस्पतालों और सड़को का निर्माण करने पर भी टैक्स वसूल करता है। यदि इन सभी के लिए टैक्स नहीं देने पर तालिबान इन्हे कभी बनने नहीं देता था और यदि बन भी जाते थे तो उन्हें तबाह कर देता था। अफगानिस्तान में अलग अलग जगहों पर बिजली पहुंचाने के लिए बिजली कंपनी से अनुमति के बदले हर साल 2 मिलियन डॉलर टैक्स वसूला गया। यानि पिछले 20 साल से हर प्रोजेक्ट में तालिबान ने खूब कमाई की है।

तालिबान का तीसरा कमाई का साधन है खनिज और खदाने। अफगानिस्तान में हर साल खनिज सम्पदा से 1 बिलियन डॉलर की कमाई  होती है। अफगानिस्तान की जमीन के नीचे लिथियम का खजाना है जिससे इलेक्ट्रिक कारो की बैटरी बनायीं जाती है। इसके अलावा अफगानिस्तान में तांबा भी बहुत ही अधिक मात्रा में उपलब्ध है। इसके अलावा कई ऐसे दुर्लभ खनिज अफगानिस्तान की जमीन के नीचे दबे है जिनकी कीमत बहुत ही ज्यादा है। तालिबान अफगानिस्तान में कई छोटी बड़ी खदानों को नियंत्रित करता है और उनसे हर साल तालिबान लगभग 10 मिलियन डॉलर की कमाई करता है। तालिबान का चौथा कमाई का साधन है विदेशो द्वारा दिया जाने दान। जाँच में कुछ ऐसे देशो के नाम सामने आये है जो तालिबान को पैसे देते है। इन देशो में रूस, पाकिस्तान और ईरान का नाम सामने आता है। सीआईए ने एक रिपोर्ट में बताया एक बार तालिबान को एक साल में 106 मिलियन डॉलर विदेशो से मिले। आखिर ये पैसे तालिबान के पास कहाँ से आये ? सीआईए के अनुसार ये पैसे कड़ी देशो द्वारा दान किये गए थे। इसके अलावा पाकिस्तान भी तालिबान की आर्थिक मदद करने में बहुत बड़ा भागीदार है। जब तालिबान का अफगानिस्तान पर पूरी तरह से कब्ज़ा नहीं था ये सभी गणनाये उससे पहले की है और ये भी गैर क़ानूनी तरीके से हो रहा था। लेकिन अब तालिबान पूरी तरह से अफगानिस्तान पर हावी हो चूका है और अब ये सभी काम खुले और व्यवस्थित तरीके से होने लगेंगे। इस तरह से तालिबान और अधिक शक्तिशाली बनता चला जाएगा और इससे भारत के लिए भी मुश्किलें खड़ी हो सकती है।

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