September 26, 2021

वृतांत – Vritaant

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Mithun Rashi / मिथुन राशि : क्या होता है मिथुन का अर्थ और किन राशियों के जातकों से रहना चाहिए सावधान

saptahik rashifal

भारतीय वैदिक ज्योतिष 12 राशि 27 नक्षत्र 7 मुख्य ग्रह और 2 छाया ग्रह के संयुक्त योगदान से अस्तित्व प्राप्त करता है। इन्ही कारको के माध्यम से समस्त ज्योतिषीय गणना की जाती है।

राशि नक्षत्र ग्रहो के नाम-

राशि
मेष , वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह,कन्या तुला वृश्चिक , धनु , मकर, कुम्भ ,मीन

नक्षत्र-
अश्विनी, भरणी, कृतिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्दा, पुनर्वसु, पुष्य, अश्लेषा,
मघा, पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा,
मूल, पूर्वाषाढा, उत्तराषाढा, अभिजित, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद,रेवती

नव ग्रह
सूर्य ,चंद्र,मंगल ,बुध ,गुरु ,शुक्र ,शनि ,राहु ,केतु

नक्षत्रो को समेत कर विभिन्न राशियों में निहित किया गया है तो ग्रहो को राशियों का स्वामित्व प्रदान किया गया है। इसके अतिरिक्त इन सभी कारको के अपने अलग स्वभाव, कारक तत्व और क्षेत्र है।

भिन्न भिन्न स्वभाव ,प्रकृति के कारण इन ग्रहो में, नक्षत्रो में मित्रता, शत्रुता ,समता के भाव उत्पन्न होते हैं। इसी प्रकार राशियों की भी मित्रता शत्रुता भी निश्चित होती है। यहाँ मैं मेष राशि के विषय में और उसकी शत्रु राशि के विषय में बात करने जा रही हूँ। मेष राशि की शत्रु राशि कौन सी है और मेष राशि के जातको को किस प्रकार इन राशियों से सावधान रहना चाहिए।

मिथुन राशि की शत्रु राशियाँ और समाधान

जिन जातकों का जन्म नाम अक्षर ( का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह ) होता हैं उनकी राशि होगी मिथुन

मिथुन राशिभचक्र की तीसरी राशि है। यह वायु तत्व की राशि है। मिथुन राशि पुरुष राशि है अगर इसके चिह्न को देखेंगे तो उसमें एक स्त्री पुरुष के जोड़े की आकृति आप को दिखेगी। इसको काल पुरुष की कुंडली में पराक्रम स्थान मित्रों का पड़ोसियों का स्थान मिला है।

मिथुन राशि के जातकों का स्वभाव

यह राशि बुध प्रधान राशि है वायु तत्व होने के कारण जातक स्थिर नहीं रहते स्वभाव से चंचल होते हैं और मन एक बच्चे की तरह होता है।जो सदैव नए-नए कार्य करने के लिए प्रेरित रहते हैं।लेकिन कभी एक कार्य को पूर्ण करने में अपना दिमाग नहीं लगाती यह दूसरों पर विश्वास भी जल्दी कर लेते हैं जिसके कारण कभी-कभी भटक जाते हैं या शिकार हो जाते हैं होते हैं होते हैं अधिक सफलता मिलती है कर सकते हैं।

मिथुन राशि की शत्रु राशि वृश्चिक धनु और मकर होती है।

वृश्चिक राशि

जिन जातकों का जन्म नाम ( तो,ना,नी,नू,ने, यो,या,यि,यु) अक्षर से शुरु होता है उनकी राशि वृश्चिक होगी।

वृश्चिक राशि अंधेरे स्थान छिद्र कुंए का प्रतिनिधि करती है। इस राशि के जातक छुपकर वार करने वाले षड्यंत्र कारी और डरपोक होते हैं। मिथुन राशि के जातकों को इनसे सावधान रहना चाहिए क्योंकि यह इनको किसी खतरे में भी डाल सकते हैं इन से प्रतिस्पर्धा करने से भी मिथुन राशि के जातकों को बचना चाहिए। वृश्चिक राशि से ज्यादा वृश्चिक लग्न के जातक अधिक नुकसानदेह साबित हो सकते हैं।

धनु राशि

जिन जातकों का जन्म नाम अक्षर (ये,यो,भा,भी,भू,धा,फ,ढ,भे) है उनकी राशि धनु होगी।

धनु राशि अग्नि तत्व की राशि है। इसके जातक अत्यधिक जिज्ञासु और दूसरों से ऊपर उठने की इच्छा रखने वाले होते हैं, लेकिन मिथुन राशि के जातक सौम्य स्वभाव के होते हैं। ठीक इसके विपरीत धनु राशि के जातक जिज्ञासु और क्रोधी होते हैं।उनकी आपस में कम ही बनती है। मिथुन राशि के जातकों को इनके साथ साझेदारी में व्यवसाय करने से या इनको अपने अधीन नौकरी देने से बचना चाहिए। धनु राशि वालों को नियंत्रित करना इनके लिए अत्यंत कठिन होगा क्योंकि धनु राशि वाले किसी के अधीन काम नहीं कर सकते और मिथुन राशि वाले किसी पर नियंत्रण करने में असमर्थ होते हैं।

मकर राशि

जिन जातकों का जन्म नाम (भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी ) अक्षर से आरम्भ होते हैं उनकी जन्म राशि मकर है।

मकर राशि का आधिपत्य काल पुरुष के दशम भाव पर है जोकि कर्म का भाव है। मनुष्य के शरीर में इसको घुटनों पर अधिकार दिया गया है। यह शनि की राशि है इस राशि के जातक अत्यधिक मेहनती और एक दिशा में कार्य पूर्ण करने वाले होते हैं मिथुन राशि के जातक एक ही कार्य में अनेक बार कार्यशैली परिवर्तित करते हैं अपने निर्णय बदलते हैं और कभी-कभी कार्य को बीच में ही छोड़ देते हैं और नए काम ले लेते हैं इन दोनों राशि वालों को कोई भी अनुबंध या महत्वपूर्ण कार्य एक साथ नहीं करना चाहिए। कभी-कभी मकर राशि के जातक गुप्त रूप से मिथुन राशि से चल कर सकते हैं या इनके गुप्त शत्रु हो सकते हैं इसलिए मिथुन राशि वालों को मकर राशि वाले जातकों से सावधान ही रहना चाहिए।

यहाँ वर्णित राशि विवेचन उनके स्वाभाविक निसर्ग प्रकृति पर आधारित है।

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