January 13, 2022

वृतांत – Vritaant

खबर, संवाद और साहित्य

नवरात्री में माँ दुर्गा के नौ रूप हमे सिखाते है नारी सशक्तिकरण का सही मतलब, नारी शक्ति का प्रतिक है नवरात्री

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पौराणिक कथाओ के अनुसार महिषासुर को वरदान मिला कि उसे को भी नहीं मार सकता है और इसी कारण से उसे तीनो लोको पर अपना कब्ज़ा कर लिया। तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने अपनी शक्तियों को एक करके माँ दुर्गा का निर्माण किया जिन्होंने नौ दिनों तक महिषासुर का सामना किया और आखरी दिन उसे हराकर फिर से शांति की स्थापना की। इन नो दिनों में माँ दुर्गा ने नारी के ऐसे गुणों को प्रदर्शित किया जो हमे नारी सशक्तिकरण का सही मतलब समझाते है। इन नौ रूपों ने पहला रूप है शैलपुत्री यानि पर्वत कि बेटी। जो जानती थी कि वह एक पुरुष प्रधान दुनिया में है और ऐसी दुनिया में खुद की जगह बनाना किसी पर्वत पर चढ़ने से कम नहीं है। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और दुनिया में नारी को पुरुषो के बराबर दर्जा दिलाया। आज हमे शिव और पार्वती को साथ में देखते है जो इस बात का प्रतिक है कि नारी का भी दर्जा पुरुषो के बराबर है। माँ दुर्ग का दूसरा रूप है ब्रम्चारिणी यानि ज्ञान की उपासक। शिक्षा और नारी का अजीब सा नाता है, हम अक्सर यही देखते है कि जब हम छोटे होते है तब हमे सीखने वाली अध्यापक एक नारी होती है और जब हम उच्च शिक्षा के जाते है तो हमे ज्यादातर अध्यापक पुरुष देखने को मिलते है। इससे यह पता लगता है कि महिलाओ को पुरुषो की तुलना में उच्च शिक्षा के लिए अवसर कम मिलते है। लेकिन अब यह हालात बदलने लगे है और अब महिलाये भी शिक्षा में पुरुषो के समान अवसर ग्रहण कर पा रही है जिनमे हम ब्रम्चारिणी का रूप देख सकते है।

माँ दुर्गा का तीसरा रूप है चंद्र घंटा यानि हर कार्य में कुशल। चंडी देवी ने अपने कई हाथो में कई हथियार लेकर रक्तबीज नामक राक्षस को हराया था और वैसे ही भारतीय महिलाये है जो एक साथ कई जिम्मेदारियां उठा रही है। वे सुबह जल्दी उठकर अपने बच्चो को समय पर स्कूल पहुँचाती है और घर के सभी काम खत्म करने के बाद खुद भी नौकरी करती है। यानि भारतीय महिला में हम चंद्रघंटा का रूप देख सकते है। माँ दुर्गा का चौथा रूप है कुशमुण्डा यानि जिन्होंने प्रकृति का निर्माण किया। जिस तरह हमे हमारी माँ से लगाव है उसी तरह हमारा प्रकृति से भी नाता है। लेकिन किसी की माँ बनने के लिए यह जरुरी नहीं कि वह उसे जन्म दे। ऐसे ही कई कुशमुण्डा के रूप में हम कई महिलाओं को देख सकते है जो हमारी प्रकृति की रक्षा कर रही है। माँ दुर्गा का पांचवा रूप है स्कन्द माता यानि कार्तिकेय की माँ। कार्तिकेय खुद देवो के सेनापति थे और वे खुद हर युद्ध लड़ने में नपुण थे क्योकि उन्हें उनकी माँ के साथ और आशीर्वाद से ही शक्ति मिलती थी। स्कन्द माता का रूप हम एक माँ देख सकते है जो अपने बच्चे के लिए किसी से लड़ने को तैयार रहती है। आज हम किसी भी तरह लड़ाई के लिए तरयारी कर रहे हो तब सबसे ज्यादा सहारा हमारी माँ का मिलता है।

छठा रूप माँ दुर्गा का कात्यायनी है जिनका जन्म गुस्से से हुआ था। कात्यायनी हमे सीखाती है कि नारी क्रोध बहुत ही शक्तिशाली होता है और नारी का क्रोध सही दिशा में हो तो यह ज्यादा शक्तिशाली होता है। हमारे इतिहास में भी कई महिलाओ ने अपने क्रोध को सही दिशा दी और इस गुस्से बड़े से बड़े शत्रु का सामना कर उन्हें पराजित कर दिया। माँ दुर्गा का सातवा रूप कालरात्रि हमे मुसीबत के समय हौसला रखना सीखाती है। ये हमे हमारे अँधेरे दिनों में रौशनी की उम्मीद देती है और बुरा वक़्त का समना करना सीखाती है। जब कालरात्रि के रूप को देखकर लोग इनसे डरने लगे तो उन्होने गंगा में स्नान करके माँ गौरी का रूप धारण किया जो हमे समय के साथ परिवर्तित होना सीखाती है। कहते है दुनिया में 8 सिद्धिया है जिन्हे सीखना नामुमकिन है लेकिन एक नारी में वो साहस है जो हर सिद्धि को पा सकती है। नारी सशक्तिकरण का यह सही मतलब है जो नवरात्री में हमे माँ दुर्गा के द्वारा देखने को मिलता है और हर नारी में ये सभी रूप मौजूद है जिससे हर नारी एक दुर्गा का ही रूप है।

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